असेंबली में बम फेंकने से भगत सिंह को क्या मिला?

आप सभी को पता है कि केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने की वजह से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी के फंदे पर लटकाया गया था।

असेंबली में बम फेंकने से भगत सिंह को क्या मिला?
Bhagat Singh

23 मार्च 1931 को सायं साढ़े 7 बजे सूरज डूबने के बाद भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन का सूर्य भी हमेशा-हमेशा के लिए डूब गया। लेकिन फांसी के फंदे पर लटकते वक्त भी भगत सिंह के चेहरे पर सिकन तक नहीं थी, जिसकी वजह से आज हम भगत सिंह के तेज की चर्चा हमेशा करते हैं और आने वाले युगों-युगों में जब भी क्रांतिकारियों की चर्चा होगी तो श्रेणी में भगत सिंह का नाम सबसे पहले आएगा। 

आप सभी को पता है कि केंद्रीय असेंबली में बम फेंकने की वजह से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। लेकिन टीम भगत सिंह ने केंद्रीय असेंबली पर बम फेंका क्यों? पहले इन बातों को जान लेते हैं। दरअसल, भारत की आवाज को दफन करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने  पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल लेकर आई थी। लेकिन भारतीय स्वतंत्रतासेनानियों का मानना था कि इन दो बिलों के जरिए अंग्रेज सरकार स्वतंत्रता आंदोलन को दफन करना चाहती थी। ऐसे में वक्त था कि बहरी सरकार के कान के पर्दों को हिला कर रख दिया जाए। फिर क्या था? भगत सिंह ने बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरुरत है का उद्घोष करते हुए अपने साथियों के साथ केंद्रीय असेंबली पर बम फेंक दिया। हालांकि बम ऐसी जगह फेंका गया जिससे कोई हताहत तो हो लेकिन बम में इतनी ताकत तो  जरुत थी कि अंग्रेजी हुकुमत की नींद उड़ा दे।

अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भगत सिंह टीम किसी को मारना नहीं चाहती थी तो असेंबली पर बम फेंका क्यों? ये सवाल बड़ा दिलचस्प है और जवाब और भी जायकेदार। हम आपको बताते हैं कि बम फेंक कर भगत सिंह टीम को क्या मिला?

1- इस बम कांड से भगत सिंह ने भारतीय जनता को दो जबरदस्त नारे प्रदान किए। पहला इंकलाब जिंदाबाद और दूसरा साम्राज्यवाद मुर्दाबाद। यह दो नारे आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलनों की शान बने और जब क्रांतिकारी इन नारों का उद्घोष करते थे तो भारतीयों की भावनाएं उत्तेजित हो उठती थी।

2- इस बम कांड ने भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन को विश्व क्रांतिकारी आंदोलन से जोड़ दिया। फ्रांसीसी क्रांतिकारी वालेयां  के क्रांतिकारी उद्घोष को भारत में दोहरा कर भगत सिंह ने यह साबित कर दिया कि दुनिया के तमाम क्रांतिकारी एक तरफ हैं और तमाम प्रतिक्रियावादी एक तरफ।

3- इस बम कांड ने क्रांतिकारी आंदोलन को एक स्पष्ट दिशा दी। यह बम मजदूर वर्ग को कुचलने के विरोध में फेंककर क्रांतिकारी आंदोलन के वर्गीय आधार और वर्गीय द़ृष्टि को प्रमुखता प्रदान की।

4- वही ब्रिटिश सरकार इन एक्शन को दबाने के लिए जितना अधित दमन करती थी जन साधारण में ब्रिटिश शासन के प्रति उतना ही आक्रोश और घृणा बढ़ती थी और भारत के आम जन इन क्रांतिकारियों का अधिक सम्मान करने लगे थे। कह सकते हैं कि इस बम कांड ने न सिर्फ सोई हुई अंग्रेजी हुकुमत को जगाने का काम किया बल्कि सोए भारतीयों की आंखों से नींद तोड़ने का भी काम किया।

5- इस बम कांड के बाद जब तक भगत सिंह जेल में रहे तब उन्होंने भूख हड़ताल को बड़े राजनैतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।