गिलगिट-बालिस्तान के पूरे गणित को समझिए

पीओके वही चिड़िया है जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है, पाकिस्तान को इसी क्षेत्र से प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा मिलती है, लेकिन इस क्षेत्र पर धीरे-धीरे चीन का कब्जा होने लगा है।

गिलगिट-बालिस्तान के पूरे गणित को समझिए
Gilgit Balistan

एक तरफ जब भारत सहित पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के गिलगित-बाल्टिस्तान में आम चुनाव कराने की अनुमति देने पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. पाकिस्तान के इस फैसले को लेकर केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को कई बार बताया जा चुका है कि गिलगित-बालिस्तान के क्षेत्र समेत पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है. इस्लामाबाद को इन क्षेत्रों में अपने अवैध कब्जे को तुरंत छोड़कर इलाके को खाली कर देना चाहिए.
तो चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि पाकिस्तान बार-बार गिलगिट-बालिस्तान यानि पीओके का राग छेड़ता रहता है। पीओके वही चिड़िया है जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है, पाकिस्तान को इसी क्षेत्र से प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा मिलती है, लेकिन इस क्षेत्र पर धीरे-धीरे चीन का कब्जा होने लगा है। ऐसे में जो लड़ाई भारत पाकिस्तान से लड़ रहा है उसके बदले उसे चीन से लड़ना चाहिए और पूरी दुनिया के सामने पाक के साथ-साथ चीनी मंसूबों को बेनकाब करना चाहिए। गौरतलब है, कई मौकों पर चीन वैश्विक मंचों पर भारत की राह में रोड़ा में बनकर पाकिस्तानियों के साथ खड़ा दिखा है।

आपको बता दें कि पाक ने  कश्मीर का जो हिस्सा अधिकृत कर रखा है, उसमें सबसे ज्यादा लेह के 11 गांव है और यह हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान ने इसके साथ मीरपुर को अधिग्रहित किया था, जहां उसने बांध बना लिया और मीरपुर जलमग्न हो गया। इसके साथ ही मीरपुर में विशेष कानून की वजह से यहां कोई बाहरी आकर नहीं बस सकता है। चूंकि यह सुन्नी मुस्लिम क्षेत्र है, इसीलिए पाकिस्तान ने यहां कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन जहां बदलाव किया वह क्षेत्र गिलगिट व बालिस्तान का है। यहां सुन्नी नाममात्र के भी नहीं है ज्यादातर लोग बौद्ध हैं या फिर शिया मुसलमान और यहां कोई भी बाहरी आकर बस सकता है। यही वजह रही कि इस क्षेत्र पर पाकिस्तान का आधिपत्य होने के बाद यहां की आबादी 70 फीसदी तक बढ़ी। इस क्षेत्र पर सुन्नी मुसलमानों का आतंक सबसे ज्यादा है जो कि अन्य धर्मों के लोगों को मुसलमान बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इतने अत्याचारों के बाद भी यहां लोग स्वास्तिक के साथ जी रहे हैं। हर किसी के गले में स्वास्तिक दिख जाता है। चाहे वह बूढ़ा हो, जवान या फिर बच्चे या मवेशी।

गौरतलब है जब भारत ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया था तो सबसे ज्यादा खुशी इन्हीं लोगों को हुई थी, वे इंतजार कर रहे हैं कि भारतीय सेना जल्द ही उन्हें नापाक दासता से मुक्त कराएंगे। भारतीय सेना इसके लिए तैयार है और आदेश का इंतजार कर रही है। वहीं मौजूदा सेना प्रमुख मनोज मुकुंद ने कार्यभार संभालते ही साफ कह दिया था कि सरकार से आदेश मिलते ही भारत पीओके को अपने हिस्से में शामिल कर लेगा। 

जब बात गिलगिट-बालिस्तान की हो रही है तो यहां बता देना जरुरी हो जाता है कि यहां पर ही बने बांध से पाकिस्तान के 70 फीसदी आवाम को बिजली मिल रही है। यहां के पठार की खूबसूरती देखते बनती है, दुनिया के 8 बड़े ग्लेशियर यहीं पर हैं और खनिज भंडार इतने कि पाकिस्तान के 90 फीसदी आवाम को पेट पाल रहा है। सबसे बड़ी यह है कि  पर्यटन के नजरिए यह पाकिस्तान का सबसे प्रभावशाली इलाका था, लेकिन 1990 के दौरान जब पाकिस्तान परस्त आतंक पांव पसारने लगा तो यह क्षेत्र धीरे-धीरे पर्यटन के लिहाज से बंजर होता चला गया, अब यहां कोई पर्यटक घूमने नहीं आता। लेकिन जहां पूरा पाकिस्तान अशांत है तो यह इलाका आज भी शांत है, यहां बौद्ध धर्मावलम्बियों का जमावड़ा है, उनकी  अपनी भाषा है वह उर्दू नहीं बल्कि शारदा लिपि में ही लिखते-पढ़ते हैं। लेह की संस्कृति का जादू उनके सिर पर चढ़कर बोलता है, लेकिन पाक व चीन मिलकर इसे खत्म कर देना चाहते हैं। 

यहां एक और बांध बनाने का काम शुरु होने वाला है जिससे कि गिलगिट-बालिस्तान पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे या यूं कह लीजिए कि पूरा का पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। विस्थापितों को जहां बसाया जाएगा वह पाकिस्तान का क्षेत्र होगा, जहां इस संस्कृति को नष्ट करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे में और भी  जरुरी हो जाता है कि भारत सरकार इस क्षेत्र को जल्द से जल्द भारत में मिलाने की प्रक्रिया शुरु कर दे।

गिलगिट-बालिस्तान के नागरिक भी चाहते हैं कि भारतीय सेना कार्रवाई कर उन्हें भारत का हिस्सा बनाए। जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का जिक्र किया तो सबसे पहले गिलगिट-बालिस्तान ने ही भारत से सुर में सुर मिलाया और वह प्रधानमंत्री की बाट जोह रहे हैं।