MBA, Phd डिग्रीधारक मनरेगा में चला रहे कुदाल

राजस्थान में तो हाल यह है कि MBA और Phd जैसी बड़ी डिग्रियां रखने वाले युवा मनरेगा में कुदाल चलाने/माटी ढोने को मजबूर हैं।

MBA, Phd डिग्रीधारक मनरेगा में चला रहे  कुदाल
MANREGA

कोरोना वायरस न सिर्फ लोगों की जान के लिए मुसीबत बना है बल्कि लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी पैदा कर दिया है। आलम यह है कि अब पढ़े-लिखे बड़े डिग्रीधारक मजदूरी करने को विवश हैं। राजस्थान में तो हाल यह है कि MBA और Phd जैसी बड़ी डिग्रियां रखने वाले युवा मनरेगा में कुदाल चलाने/माटी ढोने को मजबूर हैं। दरअसल, कोरोना वायरस की वजह लगे लॉकडॉउन की वजह से प्राइवेट कंपनियों की हालत खराब है, ऐसे में लाखों लोगों की नौकरियां जा रही हैं। जिसकी वजह से लोगों के सामने परिवार का भरण-पोषण करने की बड़ी जिम्मेदारी है। वहीं संकट की घड़ी में सरकारें मनरेगा के जरिए लोगों को काम देने की कोशिश कर रही हैं।

राजस्थान में वापस आए श्रमिक भी मनरेगा में काम कर परिवार का पेट पाल रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहां करीब 500 ऐसे लोग काम कर रहे हैं कि जिनके पास पीएचडी, एमबीए, बीएड और बीटेक जैसी डिग्रियां हैं। लेकिन नौकरी चली जाने की वजह से ये लोग बेरोजगार हो गए और मजबूरी में उन्हें दिल्ली, मुंबई, बंगलौर जैसे शहरों से वापस अपने राज्य आना पड़ा। ऐसे में वे गुजारे के लिए अब मनरेगा में मेहनत कर रहे हैं। एक दिन के काम के बदले इन्हें 220 रुपए मिल रहे हैं, जिनसे इनके घर का चूल्हा जल रहा है। 

इनमें से अधिकतर लोगों का कहना है कि वे बाहर काम करते थे, लेकिन लॉकडॉउन की वजह से उन्हें नौकरियों से निकाल दिया गया। ऐसे में उनके पास इस समय कोई दूसरा काम नहीं है, पहले उन्होंने जॉब कॉर्ड बनवाया, जिसके  बाद उन्हें मनरेगा में काम मिला। उनका कहना है कि परिवार का पालन करने के लिए इन्हें मनरेगा में काम करना पड़ रहा है। बता दें, राजस्थान में 15 अप्रैल तक राज्य में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की संख्या 60 हजार थी लेकिन 25 मई तक मनरेगा में काम करने  वालों की संख्या 38 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े स्तर पर मनरेगा लोगों को काम दे रहा है। राजस्थान सरकार मनरेगा पर 1900 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इस योजना के तहत सरकार एक ग्राम चार काम अभियान चला रही है।