मध्य प्रदेशः अपने हक के इंतजार में लोकसेवा केंद्र के कर्मचारी

मध्य प्रदेश में पिछले कई वर्षों से लोकसेवा केंद्र की भूमिका अहम रही  है। लेकिन लोकसेवा कर्मचारी लगातार सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।

मध्य प्रदेशः अपने हक के इंतजार में लोकसेवा केंद्र के कर्मचारी
Lokseva Kendra

मध्य प्रदेश में पिछले कई वर्षों से लोकसेवा केंद्र की भूमिका अहम रही  है। लेकिन लोकसेवा कर्मचारी लगातार सरकारी उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उनकी शिकायत है कि उन्हें उनके काम के हिसाब से वेतन मिलना तो दूर यहां तक कि कई-कई महीनों तक जो वेतन है, वो भी नहीं मिलता। मेडिकल सुविधा और बीमा जैसी सुविधाएं लोकसेवा कर्मचारियों के लिए किसी सपने की तरह है। इसके अलावा उन्हें किसी भी प्रकार का सरकारी लाभ भी नसीब नहीं होता। लोकसेवा न्यूज़ को लिखे गए पत्र में कर्मचारियों का कहना है कि उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। सरकार लगातार उनका शोषण करती रहती है। सुविधाएं मिलती नहीं, लेकिन जब जरुरत होती है तो उन्हें काम पर लगा दिया जाता है। 

गौरतलब है, मध्य प्रदेश में 414 लोकसेवा केंद्र हैं। जोकि सरकारी हितग्राहियों को सुविधाएं प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। लेकिन जब यह व्यवस्था शुरु हुई तो इसे ठेकेदारों के हवाल कर दिया गया। लोकसेवा अधिनियम तो बना दिया गया लेकिन कर्मचारी अधिनियम नहीं बनाया गया। जिसकी वजह से कर्मचारी ठेकेदारों के हाथ की कठपुतली बन गए हैं। लोकसेवा कर्मचारियों के मुताबिक - लोकसेवा केंद्रों में एक आवेदन का शुल्क 40 रुपये होता है जिसमे से 35 रुपये ठेकेदार को जाता है। लेकिन अगर किसी महीने निर्धारित संख्या में आवेदन नहीं आते हैं तो शासन ठेकेदारों को 75000 रुपए बतौर सहायता राशि देता है। हालांकि, कई केंद्र पर ऐसा होता है, तो हर महीने शासन को लाखों को चूना लग जाता है।

वहीं अगर लोकसेवा कर्मचारियों की बात करें तो प्रत्येक केंद्र पर 3-4 कर्मचारी होते हैं, जिन्हें ठेकेदार 3000-4000 रुपए बतौर सैलरी देता है। ऐसे में लोकसेवा कर्मचारियों की मांग है कि सरकार उनकी समस्या की तरफ देंखे और उन्हें उनका हक दिलाए। उनके लिए उचित श्रम कानून बनाए, जिससे उन्हें सम्मान मिल सके। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यहां प्रदेश सरकार की न्यूनतम वेतन के नियम की भी अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों की मांग है कि शासन द्वारा उन्हें लाभ मिलना चाहिए न कि ठेकेदारों को और अगर ठेकेदारों को लाभ देना ही तो कम से कम कर्मचारियों का हक तो उन्हें मिलना ही चाहिए।

गौरतलब है, मध्य प्रदेश में लोकसेवा केंद्र हमेशा शक के घेरे में रहा है। कभी  यहां टेंडर में घोटाले सामने आते हैं तो कई बार कर्मचारियों के शोषण के मामले। ऐसे शिवराज सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और इस विवादित विभाग की समस्या का समाधान करना चाहिए।