INDIA से भारत की ओर हिंदुस्तानियों की वापसी

इंडिया गर्लफ्रेंड की तरह है, जो खूबसूरत है, उसके कपड़े स्टाइलिश है, उसकी अदाएं मंत्रमुग्ध करने वाली है, उसके नखरें भले ही लोगों को दीवाना कर दे, लेकिन मुसीबत पड़ने पर वही गर्लफ्रेंड दूसरे की बाहों में अटखेलियां करने लगती है

INDIA से भारत की ओर हिंदुस्तानियों की वापसी
Bharat Ki Ore

रजत जय त्रिपाठी की कलम से -  एक दौर था, जब हिंदुस्तानी इंडिया में रहने के लिए भारत को नकार घुड़दौड़ मचाए थे। देश के बड़े शहरों जैसे - मुंबई, दिल्ली, बंगलौर में ट्रेनों से रोजाना लाखों लोग उतरते देख ऐसा लगता था कि अब सिर्फ इंडिया ही रहेगा, भारत का नामोनिशां खत्म हो जाएगा। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल भिन्न है। लाखों लोग इंडिया को छोड़ अपने भारत जाना चा रहे हैं, वे चाहते हैं कि अगर यमराज उनके प्राण लेने आए तो वे भारत में मरे न कि इंडिया में जहां उनके मरे शरीर को लड़की भी नसीब नहीं होगी। सड़कों पर आज वही मजदूर पैदल, साइकिल और ट्रकों पर बैठकर अपने भारत का दीदार करने को आतुर हैं। इसके लिए भले ही उन्हें वर्दीवाले दो-चार डंडे क्यूं न मार दे। दरअसल, इंडिया गर्लफ्रेंड की तरह है, जो खूबसूरत है, उसके कपड़े स्टाइलिश है, उसकी अदाएं मंत्रमुग्ध करने वाली है, उसके नखरें भले ही लोगों को दीवाना कर दे, लेकिन मुसीबत पड़ने पर वही गर्लफ्रेंड दूसरे की बाहों में अटखेलियां करने लगती है। वहीं भारत परिणय सूत्र में बंधी पत्नी जैसी है, जो मॉडर्न भले ही न हो लेकिन मुसीबत में वही साथ देती है। इतना ही नहीं वह विश्वास भी देती है कि इस जन्म ही नहीं अगले सात जन्मों तक वह निःस्वार्थ भाव से साथ देती रहेगी। आज भले ही लोगों भारत रुपी पत्नी की याद आ रही हो, लेकिन एक लंबे दौर तक लोगों ने गर्लफ्रेंड (मुंबई, दिल्ली, बंगलौर इत्यादि) के लिए उसी का त्याग कर दिया था पर कोरोना रुपी महामारी ने हिंदुस्तानियों को याद दिला दिया कि मुसीबत के समय वही भारत काम आता है, जिसको उन्हीं ने बर्बाद किया था।

इंडिया को बनाने के चक्कर में भारत को बर्बाद कर दिया
Image may contain: one or more people, shoes and outdoorइंडिया की चकाचौंध दुनिया के साथ भारतीयों को भी लुभाती है। तभी तो भारतीयों ने भारत को बर्बाद कर इंडिया को बनाया। जरा सोचिए, अगर भारतीय न होते तो क्या दिल्ली, मुंबई, बंगलौर, चेन्नई जैसे इंडियन शहरों की चमक ऐसी होती। भारतीयों ने इंडिया को बनाया, इसमें उनका कोई कुसूर नहीं है, लेकिन भारतीय इंडिया के हो गए, यही उनका गुनाह है। आज भी भारत बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करता है। वहां इंडिया जैसे - स्कूल, अस्पताल, सिनेमा, सड़क, एयरपोर्ट नहीं है, लेकिन वह फिर भी खूबसूरत है। उसकी खूबसूरती की वजह है, वहां कुछ भी बनावटी नहीं है। जो है वह भारत की मिट्टी से जुड़ी है। आज भारत में New India की बात होती है, अगर हिंदुस्तानियों ने भारत के महत्व को समझा होता तो आज नए भारत की बात होती, जहां प्रकृति से छेड़छाड़ के बिना विकास होता, लोगों को बुनियादें सुविधाएं मिलती। भारत के बच्चों, किसानों, महिलाओं के चेहरे पर खुशी मिलती। उम्मीद है कि अब हिंदुस्तानी इस बात को समझेंगे और जब कोरोना खत्म होगा तो लोग New India की जगह नए भारत की बात करेंगे।

चलिए ट्रकों में भरे श्रमिकों का धर्म ढूंढते हैं...
Image may contain: one or more people, people standing and outdoorभारतीय सियासत में सब-कुछ जाति-धर्म के इर्द-गिर्द ही घूमते है। राष्ट्रीय मीडिया में भी जाति-धर्म की खबरों को ज्यादा महत्ता दी जाती है। हमारे दर्शकों को भी जाति-धर्म और भारत-पाकिस्तान की खबरों को पढ़ने-सुनने में ज्यादा आनंद मिलता है। तो चलिए हम भी ट्रकों में बोरियों की तरह भरकर जा रहे श्रमिकों का धर्म ढूंढते हैं, जानते हैं उनका धर्म जो बेजोड़ गर्मी में पैदल ही अपने घरों को निकल पड़े हैं। क्या है उनका धर्म जो साइकिल पर बीवी-बच्चों को बिठाकर भारत को वापस ले चले हैं? इस प्रश्न का जवाब बड़ा मुश्किल है, क्योंकि हमने कभी इंसानियत को समझने की कोशिश नहीं की और जब कोशिश की तो अपने स्वार्थ से ज्यादा सोचा ही नहीं। तो भला इनका जाति-धर्म बताना इतना आसान काम कहां? लेकिन निराश मत होइए हम आपको इनकी जाति-धर्म जरुर बताएंगे, क्योंकि खबरों में ये न हो तो खबरें कौन पढ़ता-सुनता है। ये मजबूर मजदूर जाति के लोग हैं, जिनका एक ही धर्म है - मजदूरी। इसी धर्म की बदौलत इन्होंने इंडिया को उसका नया रुप प्रदान किया है। इसी धर्म की वजह से सरकारों ने हमेशा इनकी उपेक्षा की है। इसी धर्म की वजह से संविधान भी इन्हें नहीं स्वीकारता। इसी धर्म की वजह से कानून इनके लिए कठोर हो जाता है। इसी धर्म की वजह से स्वार्थ खत्म हो जाने के बाद इंडिया इन्हें दुत्कारता है। इसी धर्म की वजह से अब भारत भी इनका बलिदान मांग रहा है। इसी धर्म की वजह से इंडिया वाले इन्हें गंवार कहते हैं। इसी धर्म की वजह से ये अपनी कमाई से ज्यादा अपना खून खर्च कर देते हैं।