फर्जी वेंटिलेटर को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गुजरात सरकार को घेरा

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गुजरात सरकार द्वारा किए गए वेंटिलेटर के घपले को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि 4 अप्रैल को मुख्यमंत्री विजय रुपानी कोरोना काल में पहली बार गांधीनगर से अहमदाबाद आते हैं।

फर्जी वेंटिलेटर को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गुजरात सरकार को घेरा
Pawan Khera

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गुजरात सरकार द्वारा किए गए वेंटिलेटर के घपले को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि 4 अप्रैल को मुख्यमंत्री विजय रुपानी कोरोना काल में पहली बार गांधीनगर से अहमदाबाद आते हैं। इस दौरान सिविल अस्पताल में वे धमन नामक वेंटिलेटर का उद्घाटन करते हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री अपने मित्र पराक्रम सिंह जडेजा एवं ज्योति सीएनसी नामक कंपनी की तारीफ भी करते हैं। इसके बाद सिविल अस्पताल में CSR के तहत कंपनी 1000 नई धमन वेंटिलेटर देती है। लेकिन 15 मई को उसी अस्पताल के अधीक्षक ने सरकार को सूचित किया कि एनेस्थीसिया विभाग के मुताबिक धमन वेंटिलेटर मरीजों के लिए उपयोगी नहीं हैं। लेकिन मामला इतने पर खत्म नहीं होता, बाद में पता चलता है कि धमन वेंटिलेटर है ही नहीं वो तो एक मैकेनाइज्ड एम्बू है। मतलब गुजरात सरकार ने कोरोना काल में भी घपला कर लिया।

वहीं पवन खेड़ा ने आगे बताया कि राज्य सरकार ने धमन नामक उस तथाकथित वेंटिलेटर को 10 बार वेंटिलेटर का दर्जा देती है। वहीं प्रचार-प्रसार में माहिर गुजरात सरकार की बातों पर विश्वास कर कई अन्य राज्यों ने उस तथाकथित वेंटिलेटर का ऑर्डर दे दिया। लेकिन भारत सरकार का कंपनी HLL लाइफकेयर 5000 मशीनों का आर्डर करती तब जाकर सच सामने आता है कि यह मशीन कोरोना के खिलाफ जंग में किसी भी प्रकार सहयोगी नहीं है।

पवन खेड़ा के मुताबिक, सिविल अस्पताल से 338 कोरोना मरीज ठीक होकर निकल चुके हैं, लेकिन 343 मरीजों की मौत भी हुई है। जबकि एसवीपी अस्पताल से 884 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि यहां सिर्फ 117 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा कई निजी अस्पतालों से भी मरीज अच्छी खासी संख्या में ठीक होकर जा चुके हैं। लेकिन सिविल अस्पताल में इस्तेमाल किए गए फर्जी धमन की वजह से यहां कोरोना से मरने वालों की संख्या अन्य अस्पतालों के मुकाबले अधिक है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इस मशीन को DCGI (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) से लाइसेंस भी प्राप्त नहीं है। वहीं अस्पतालों में प्रयोग के पहले इसे सिर्फ एक मरीज पर जांचा गया था। अहमदाबाद की स्थिति भयावह है। लोगों में भय और अविश्वास का माहौल है कि सरकार ने अहमदाबाद के कलेक्टर एवं आयुक्त को आनन-फानन में ट्रांसफर कर दिया है। मरीजों के रिश्तेदार उत्तर की तलाश में एफआईआर दर्ज कराने पर मजबूर हो रहे हैं।