डीजल की कीमतें 80 पार, देश पर पड़ने वाली है महंगाई की मार

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता अक्सर एक नारा लगाते थे, जो कुछ इस प्रकार है - बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार, अब बार मोदी सरकार।

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी कार्यकर्ता अक्सर एक नारा लगाते थे, जो कुछ इस प्रकार है - बहुत हुई जनता पर पेट्रोल-डीजल की मार, अब बार मोदी सरकार। इन्हीं नारों की बदौलत बीजेपी तत्कालीन यूपीए सरकार की नींद उड़ा दी थी, लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है। बीजेपी 6 साल से ज्यादा वक्त से सत्ता में है, लेकिन देश में डीजल-पेट्रोल की कीमतें नियंत्रित होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। यहां तक डीजल की कीमतें पेट्रोल का पार कर गई है। देश के कई राज्यों में डीजल की कीमतें 80 रुपए से ज्यादा हैं। ऐसे में अब जनता सरकार से गुजारिश कर रही है कि कम से डीजल की कीमतें कम कर दीजिए।

दरअसल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि ट्रांसपोर्ट, कृषि, उद्योग जैसे अहम क्षेत्रों में डीजल की उपयोगित अधिक होती है। ऐसे में अगर ट्रांसपोर्ट का खर्चा अधिक होगा तो सामानों के दाम महंगे होंगे। हालांकि, इन स्थितियों में किसानों पर ही मार पड़ेगी, क्योंकि किसान महंगा डीजल खरीद कर खेतों की सिंचाई करेगा, लेकिन जब उसके फसल बेचने की बारी आएगी तो उसे फसलों के उचित दाम भी नहीं मिल सकेंगे। यानि डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों पर चौतरफा मार पड़ सकती है।