वैज्ञानिक जिसे कोरोना की दवा मान रहे, भारत के पास है उसका भंडार

चिकित्सा विज्ञान से जुड़े वैज्ञानकों का दावा है कि कोरोना के खिलाफ जंग में Dexamethasone दवा ब्रह्मास्त्र साबित हो रही है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस दवा के प्रयोग से वेंटिलेटर पर पड़े मरीजों की मृत्यु दर कम हो गई।

वैज्ञानिक जिसे कोरोना की दवा मान रहे, भारत के पास है उसका भंडार
Corona Medicine

चिकित्सा विज्ञान से जुड़े वैज्ञानकों का दावा है कि कोरोना के खिलाफ जंग में Dexamethasone दवा ब्रह्मास्त्र साबित हो रही है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस दवा के प्रयोग से वेंटिलेटर पर पड़े मरीजों की मृत्यु दर कम हो गई। वहीं Dexamethasone दवा का भारत का पास अकूत भंडार है। इतना ही नहीं भारत दुनिया के 107 देशों को इस दवा का निर्यात करता है। भारत में इस दवा के 20 ब्रांड मौजूद हैं। इतना ही यह दवा इतनी सस्ती है कि हर आदमी इसे खरीद सकता है और उसके जेब पर खर्च भी कम पड़ेगा। बता दें, भारत में इस दवा का एक पत्ता जिसमें 10 टैबेलट होते हैं, उसकी कीमत मात्र 3 रुपए हैं, यानि एक गोली की कीमत मजह 30 पैसे।

भारत में Dexamethasone दवा का कारोबार 100 करोड़ रुपए सलाना का है। वैसे इस दवा का प्रयोग एलर्जी, दमा, क्रोनिक, ऑब्सट्रक्टिव लंग डिसीज, दांत और आंखों की सूजन इत्यादि के लिए किया जाता है। लेकिन ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रयोग के कोरोना से गंभीर रुप से पीड़ित मरीजों की जान बचाई जा रही है। बता दें, भारत में इस दवा को सबसे ज्यादा जाइडस कैडिला, वॉकहॉर्ट, कैडिल फार्मास्यूनिटक्लस, जीएलएस फॉर्मा और वीथ लिमिटेड नाम की दवा कंपनियां बनाती हैं। दवा कंपनियां Dexamethasone दवा को तीन रुप (टैबलेट, इंजेक्शन और ओरल ड्रॉप) में बनाती हैं।

बता दें, बीबीसी की एक रिपोर्ट की माने तो कोरोना के इलाज के डॉक्टरों को एक प्रभावी दवा मिल गई है। जिसका नाम Dexamethasone है। यह एक पुरानी दवा है, जोकि किफायती भी है। Dexamethasone के इस्तेमाल से कोरोना वायरस से गंभीर रुप से बीमार मरीजों को बचाने में सफलता भी मिली है। ब्रिटेन के एक एक्सपर्ट का कहना है कि इस दवा की हल्की खुराक से ही कोरोना से लड़ने में मदद मिली है। इस दवा के ट्रायल के दौरान पता चला कि वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों को यह दवा दिए जाने के बाद उनकी मौत का खतरा 40 फीसदी से घटकर 28 फीसदी हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Dexamethasone दवा अधिक फायदा ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों पर भी हुआ है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर दवा ब्रिटेन में पहले से उपलब्ध होती तो कोरोना से कम से कम 5000 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। शोध के दौरान 20 कोरोना मरीजों को Dexamethasone दवा दी गई, जिनमें से 19 घर पर ही ठीक हो गए। यानि उन्हें अस्पताल आने की जरुरत ही नहीं पड़ी।

बता दें, कई और बीमारियों के दौरान पहले से इस दवा का प्रयोग इन्प्लैमेशन घटाने के लिए किया जाता रहा है। ट्रायल के दौरान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की टीम ने हॉस्पिटल में भर्ती करीब 2000 मरीजों को ये दवा दी थी। इन मरीजों की तुलना अन्य 4000 मरीजों से की गई जिन्हें ये दवा नहीं दी गई थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस दवा के प्रयोग से मृत्यु दर घटाने में सफलता मिली है, यह एक बड़ी कामयाबी है।