दलितोत्थान की उपलब्धियों से भरा रहा मोदी सरकार का कार्यकाल - विजय सोनकर शास्त्री

मोदी सरकार की एक वर्ष में अनेकों उपलब्धियाँ रही औंर उन उपलब्धियों का वैसे तो संपूर्ण देश पर ब्यापक प्रभाव रहा किन्तु संपूर्ण दलित समाज पर कुछ उपलब्धियों का कितना महत्वपूर्ण प्रभाव रहा, इस दृष्टि से हम यहाँ उल्लेख करेंगे।

दलितोत्थान की उपलब्धियों से भरा रहा मोदी सरकार का कार्यकाल - विजय सोनकर शास्त्री
Bizay Sonkar Shastri

विजय सोनकर शास्त्री (बीजेपी प्रवक्ता) - केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने दूसरे कायकाल का एक वर्ष पूर्ण कर लिया है I एक वर्ष के मध्य केंद्र सरकार ने कई ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनकी कल्पना स्वतंत्र भारत में किसी भी राजनीतिक दल के साथ-साथ देश के अधिकांश नागरिकों ने भी नहीं किया था। गत वर्ष 30 मई को प्रधानमंत्री मोदी ने अपना पद भर ग्रहण करने के उपरांत अपने निर्धारित एजेंडे के अंतर्गत गरीबों, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं एवं युवकों के समग्र कल्याण हेतु चलायी जा रही वरीयता आधारित योजनाओं को पुनः गति प्रदान की।

मोदी सरकार की एक वर्ष में अनेकों उपलब्धियाँ रही औंर उन उपलब्धियों का वैसे तो संपूर्ण देश पर ब्यापक प्रभाव रहा किन्तु संपूर्ण दलित समाज पर कुछ उपलब्धियों का कितना महत्वपूर्ण प्रभाव रहा, इस दृष्टि से हम यहाँ उल्लेख करेंगे। उदाहरणार्थ- अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए के कारण दलित समाज को कश्मीर में  समान नागरिकता का भी अधिकार नहीं था। वाल्मीकि जाति के लोग तो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत भी सफाई कर्म के आलावा कोई सरकारी नौकरी नहीं कर सकते थे। वही चीनी और पाकिस्तानीयों को समान नागरिकता दे दी गयी थी, किन्तु पठानकोट से गये दलितों को समान नागरिकता से भी पूर्णरूपेण वंचित रखा गया था।

नए कार्यकाल में अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए को समाप्त करना, तीन तलाक कानून  और नागरिक संशोधन कानून बनाना जहां मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, वही अदृश्य शत्रु के रूप में सामने आए कोरोना वायरस के संक्रमण से देशवासियों को बचाने की चुनौतियों का सामना भी सफलतापूर्वक कर रही है, यही कारण है कि आज वैश्विक आपदा की घड़ी में संसार भर ने भारत को रोल मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया।

भारत के विकास को गति देने के लिए मोदी सरकार लगातार छह वर्ष से कार्य कर रही हैI गत पांच वर्षों के मध्य  सरकार ने अपनी योजनाओं और योजनाओं के सफल क्रियान्वन से देश की तस्वीर को बदलने का काम किया। जन धन अकाउंट, उज्ज्वला गैस योजना, हर ग्राम तक बिजली की पहुंचना, स्वच्छ भारत अभियान एवं ग्रामों में हर नागरिक के आवास में शौचालय का निर्माण, स्वास्थ्य हेतु आयुष्मान भारत एवं आरोग्य सेतु, रोजगार की दिशा में स्टार्टअप एवं मेक इन इंडिया जैसी मूल योजनाओं को प्रारम्भ करके मोदी सरकार ने गरीबों, दलितों, पिछड़ों, युवाओं, महिलाओं इत्यादि के लिए विकास के नए मार्ग खोल दिए, वही मोदी सरकार ने भारत की सामाजिक-आर्थिक छवि को बदलने सम्बन्धी निर्णय एवं प्रत्येक क्षेत्र से संबद्ध सैकड़ों योजनाओं के सफल क्रियान्वन का प्रभाव देश के अंदर नहीं, बल्कि विदेश में भारत की बदलती छवि के रूप में सभी ने स्वीकार किया। अपने दूसरे कार्यकाल में विकास की उसी प्रक्रिया को मोदी सरकार ने और अतिरिक्त गति प्रदान की। अब गत एक वर्ष के कार्यकाल में मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि कोरोना से जूझते भारत में चलाये जा रहे राहत-बचाव कार्यों के रूप में देखा जा सकता है।

केंद्रीय सरकार, कोरोना महामारी एवं दलित समाज

नए वर्ष 2020 के पहले माह से ही विश्व में कोरोना वायरस के संक्रमण के समाचार सामने आना प्रारम्भ हो चुके थे। इस महामारी का प्रारंभ तो चीन से हुआ और फिर यूरोप, अमेरिका के साथ ही भारत में भी कोरोना वारयस का यह अदृश्य शत्रु घुसपैठ कर बैठा। मार्च के तीसरे सप्ताह तक भारत कोरोना की चपेट में आना शुरू हो गया और मरीजों की संख्या लगभग हर तीसरे दिन दोगुनी हो कर बढ़ने लगी। कोरोना जनित संकटों पर प्रारम्भ से दृष्टि रखने वाली मोदी सरकार ने अंततः 23 मार्च को एक दिन का 'जनता कर्फ्यू' और फिर 25 मार्च से देशव्यापी 'लॉक डाउन' की घोषणा कर दी। लॉक डाउन के साथ देशी और विदेशी उड़ानों और रेलगाड़ी तथा सड़क परिवहन को भी रोक दिया गया, वही संक्रमितों एवं मरीजों की कोरोना टेस्टिंग के साथ-साथ क्वारंटाइन करने का सम्बन्धी निर्णय लागू करके मोदी सरकार ने पूरे देश को कोरोना से बचाने में अपने साथ देश की पूरी शक्ति लगा दी।

कोरोना महामारी के प्रारंभ में कोरोना यानी वायरसों के टेस्टिंग का भारत में मात्र एक लैब था। अधिकांश टेस्ट अमेरिका भेज कर कराया जाता था। टेस्टिंग किट का भी पूर्णरूप से आयात किया जाता था। किन्तु प्रधानमंत्री मोदी जी के आह्वान एवं प्रश्रय पर आज देश में पांच सौ से अधिक लैब काम कर रहीं हैं। दो लाख किट प्रतिदिन निर्मित करने की क्षमता देश में विकसित हो चुकी है। आज देढ़ से  दो लाख प्रतिदिन टेस्ट हो रहें हैं। यह तो स्पष्ट है कि- 'कोरोना हारेगा और भारत जीतेगा।'

लॉक डाउन के मध्य गरीबों, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, युवाओं, वृद्धों, भूमिहीन एवं छोटे किसानों केसाथ मोदी सरकार ने देश के प्रत्येक नागरिक को राशन, खाने-पीने का सामान, नगद सहायता राशि देने सहित मरीजों की देखभाल करने में जुटे कोरोना योद्धाओं को हर प्रकार की सुविधा देने का काम किया। सरकार की मदद के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, स्वयं सेवी संस्थाएं एवं अन्य संगठनों के करोड़ों कार्यकर्ता भी अपने-अपने ढंग से जुट गए। महीनों तक राज्य सरकारों की अव्यवस्था एवं असफलता के कारण लोग सडकों पर भी चलते हुए दिखे, किन्तु उन्हें बना हुआ भोजन उपलब्ध कराने में देश की जनता एवं करोड़ों संघ के स्वयंसेवकों, भाजपा के कार्यकर्ताओं एवं अन्याय गैर सरकारी संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ताओं को देखा गया। पुलिस, सफाईकर्मी, स्वास्थ्य तंत्र. शासन-प्रशासन से जुड़े करोड़ों लोगों की मदद से मोदी सरकार ने कोरोना संक्रमण को एक बड़ी महामारी का रूप लेने नहीं दिया। सफाई कर्मीयों पर फूलों की वर्षा ने सबका मन मोह लिया।

कोरोना महामारी का सबसे अधिक भय आर्थिक रूप से अशक्त दलित समाज के अंदर फैलने को लेकर था, किन्तु मोदी जी की दूरदर्शिता और केंद्रीय सरकार के प्रयासों ने दलित समाज को अब तक बचाये रखा है।

संसार के प्रत्येक देशों में कोरोना महामारी के विरुद्ध सत्ता एवं विपक्ष दोनों एकजुट होकर सामना करते हुए दिखें किन्तु एक मात्र हमारे देश में विपक्ष केवल केंद सरकार की आलोचना एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते हुए दिखाई पड़ा। इतना ही नहीं, भविष्य में देश के इतिहास में विपक्ष की ऐसी भूमिका के लिए प्रश्न भी किया जायेगा। भविष्य की पीढियाँ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और  उनके परिवार के सदस्यों यानी राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी बाड्रा और उनके शुभ-अशुभ चिंतकों द्वारा ऐसे कोरोना महामारी के मध्य भारत की स्थिति इटली जैसी बनाने के प्रयास के रूप में  देख कर आश्चर्य करेंगी। विशेषतः लाॅक डाउन लगाने के बाद विपक्ष दल कांग्रेस का यह प्रश्न  पूछना कि क्यों इतनी जल्दी लाॅक डाउन लगाया गया और हटाने की प्रक्रिया पर पुनः वही प्रश्न करना उनके  भ्रमित मानसिकता का द्योतक था।

मोदी सरकार की दूरदर्शिता के रूप में कोरोना संक्रमण के कारण देश में हुए लॉक डाउन से उत्पन्न हुई विपरीत आर्थिक परिस्थितिओं से निपटने के लिए मोदी सरकार ने बीस लाख करोड़ के जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, उसमें छोटे-मध्यम-बड़े उद्योगों के साथ ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सभी वर्ग का ध्यान रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से घोषित आर्थिक पैकेज का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत रखा गया है। पैकेज में प्रवासी मजदूरों, छोटे किसानों, स्ट्रीट वेंडर्स, रेहड़ी-पटरी वाले अत्यंत छोटे छोटे व्यापारियों, आदिवासियों, मध्य वर्गीय परिवारों के लिए राहत कार्यों एवं उनके पुनरुत्थान-ब्यवस्था की घोषणा किया गया।

इसी तरह कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, हर्बल खेती के लिए अलग-अलग राहत देकर मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब, दलित, पिछड़े वर्ग के समाज के सामने आए संकट को दूर करने का काम भी किया है। मनरेगा के तहत 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन और मनरेगा दिवस की संख्या दोगुना करने का निर्णय भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए नयी राह प्रशस्त करेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है। लॉक डाउन के मध्य प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों की घर वापसी के मामले का भी मोदी सरकार ने गंभीरता के साथ सामना किया। उसी के परिणाम से करोड़ों श्रमिक सुरक्षित अपने घरों तक पहुंच चुके हैं। 

कोरोना से उत्पन्न हुई स्थितियों का सामना करते हुए मोदी सरकार अब लॉक डाउन को खोलने में जुट गयी है। लॉक डाउन खोलने के साथ ही कोरोना संक्रमण को रोकना और आर्थिक स्थितियों को पुनः पटरी पर लाना मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। लेकिन इस चुनौती से मोदी सरकार आने वाले समय में सफलता के साथ निपटने में सफल सिद्ध होगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। कोरोना के बाद आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक क्षेत्र के लिए खुल रहे नए रास्ते आर्थिक रूप से शक्तिशाली भारत की परिकल्पना को अति शीघ्र ही साकार करेंगे।

370 और 35 ए समाप्ति दलित समाज हेतु हितकारी

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 5 अगस्त 2019 को देश का इतिहास और भूगोल दोनों ही बदल गया। बदलाव का यह इतिहास उस जम्मू-कश्मीर ने आभास किया जो वर्षों से अनुच्छेद-370 और धारा-35ए के कारण उत्पन्न हुए भेदभाव को झेलता आ रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब दूसरी बार देश की कमान संभाली और नए कार्यकाल में संसद सत्र के मध्य 5 अगस्त 2019 को उच्च सदन राज्यसभा में अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए को समाप्त करने का प्रस्ताव लाया तो पूरा संसार आश्चर्यचकित होकर रह गया। इसके उपरांत 6 अगस्त 2019 को लोकसभा में 370 सांसदों ने अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए को समाप्त करने पर अपनी अंतिम मोहर लगा दी। 

मोदी सरकार के इस निर्णय का पूरे देश के साथ ही राज्य की पीड़ित जनता और दलित समाज के लोगों ने जमकर स्वागत किया। उन्हें लगा कि अब उनकी जिंदगी की नयी सुबह आयी है। लेकिन यह फैसला उन सभी नेताओं और लोगों पर बिजली बन कर गिरा, जो अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए की आड़ में दशकों से अपनी दुकान चला रहे थे। किन्तु देश के विशेषतः जम्मू-कश्मीर  राज्य में रहने वाले दलित समाज की जनता मोदी सरकार के निर्णय से खुश ही नहीं अपितु उनके खुशी का ठिकाना नहीं  था।

जम्मू-कश्मीर के दलित समाज को  लगने लगा कि अब वे भी भारत के संविधान और कानून में मिले अधिकारों को प्राप्त करके अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम कर सकेंगे, उन्हें भी आरक्षण का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। दलित बच्चे भी अब पढ़कर नौकरी प्राप्त कर सकेंगे और दलित समाजके लोग भी भी अब राज्य में अपने लिए भूमि खरीद सकेंगे। वाल्मीकि जाति के लोग अब जम्मू-कश्मीर राज्य केसाथ पूरे देश में दलित जाति प्रमाणपत्र पाकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर सकेंगे। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनुच्छेद-370 और धारा-35 ए को समाप्त करने का जो वादा भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किया था, उस वादे को पूरी ईमानदारी के साथ पूरा किया। अब जम्मू-कश्मीर के दलित परिवार के साथ ही सामान्य लोग भी बाबा साहब के सपने के अनुरूप अपना जीवनयापन कर सकेंगे।

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मोहर

दलित समाज के हितों की सुरक्षा के लिए हमारी मोदी सरकार द्वारा उठाये गए कदमों का ही यह परिणाम है कि एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही निर्णय को पलट कर पुराने कानून को पुनः लागू करने का निर्णय दिया I दलित हितों के लिए प्रतिबद्ध मोदी सरकार ने एससी/एसटी एक्ट पर अविलम्ब याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की थी I 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस एक्ट के प्रावधानों को हल्का करने का निर्णय दिया था, जिसे भाजपा में अमान्य कर दिया था।

केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने के उपरांत 1 अक्टूबर 2019 को  न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति भूषण गवई की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णय को रद्द कर दिया। साथ ही दलित हितों के लिए काम कर रही मोदी सरकार को ठीक ठहराया।

कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि मोदी सरकार दलितों के सम्पूर्ण विकास एवं कल्याण के लिए काम कर रही है और इस सम्बन्ध में मोदी सरकार के विरुद्ध कोई उंगली नहीं उठाया जा सकता है। मोदी सरकार को दलित विरोधी बताने वाले लोगों की असलियत स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के सामने उजागर कर दी।

तीन तलाक कानून शोषित महिलाओं हेतु वरदान

केंद्र में मोदी सरकार का गठन होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी मुस्लिम समाज से जुडी समस्याओं का निदान करने के लिए भी काम करते आ रहे थे। इस दिशा में मुस्लिम महिलाओं की स्थितियों को बदलने के लिए उन्होंने तीन तलाक की प्रथा पर अंकुश लगाने की पहल कीI अपनी सरकार के पहले कार्यकाल में तीन तलाक को रोकने के लिए मोदी सरकार ने जिस कानून को बनाया था, वह कानून विपक्ष की तमाम रुकावटों एवं विरोध के बावजूद संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया और 1 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन तलाक कानून को अपनी मंजूरी दे दी।

इस कानून को अध्यादेश के जरिये लागू करने की शुरुआत हुई थी, इसीलिए तीन तलाक कानून 19 सितंबर 2018 से लागू माना गया। लोक सभा में पारित होने के बाद राज्य सभा में जब यह कानून पारित हुआ था, उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है। सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है।

तीन तलाक कानून का पास होना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। तुष्टिकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। महिलाओं को उनका हक देने का गौरव मोदी सरकार को ही प्राप्त हुआ है। वैसे जनजागरण की कमी के कारण हजारों दलित समाज की बेटियो को लव-जेहाद में फंसाकर उनका शरीया कानून के आड में भारी शोषण होता था। ऐसे शोषणकारी तत्वों पर लगाम कसा जा सकेगा।

देखा जाये तो इस कानून का सबसे ज्यादा लाभ मुस्लिम समाज के उस वर्ग को मिलेगा, जो वर्ग अपने कथित हालातों में बदलाव की उम्मीद लेकर मुस्लिम धर्मपरिवर्तन करने के लिए बाध्य हुआ था। निसंदेह इस वर्ग में सबसे बड़ी संख्या दलित और पिछड़े वर्ग की रही है, लेकिन मुस्लिम धर्म अपनाने के बावजूद न तो उनके हालातों में कोई खास परिवर्तन आया और न ही मुस्लिम धर्म के रहनुमाओं ने उनकी तकलीफों को दूर करने के लिए कोई कदम उठाये। तीन तलाक की प्रथा से सबसे ज्यादा पीड़ित और प्रभावित मुस्लिम समाज का यही वर्ग रहा है। मुस्लिम समाज के उच्च वर्ग की अपेक्षा निम्न वर्ग में तीन तलाक के कारण महिलाओं को दशकों से जिस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था, मोदी सरकार ने एक झटके में उन मुसीबतों को समाप्त कर दिया। यह मुस्लिम समाज में बदलाव की नयी राह प्रशस्त करेगा।

भव्य राम मंदिर निर्माण का ऐतिहासिक निर्णय और दलित समाज 

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु भाजपा ने जो संकल्प लिया था, वह संकल्प भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले ही वर्ष में पूरा हो गया। भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण पर उच्चतम न्यायालय ने 9 नवम्बर 2019 को अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना। 40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद न्यायालय के निर्णय ने श्रीराम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया।

उच्चतम न्यायालय के साथ भव्य राम मंदिर संघर्ष का अंत हुआ एवं सरकार तीव्र गति से निर्माण कार्य की दिशा में अग्रसर हुई।सन् 2014 से पहले तक यह प्रकरण केवल लटकाया जा रहा था और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की लगातार यही प्रयास था कि श्रीराम मंदिर के मामले को लटकाये रखा जाए। इसके लिए कांग्रेस की नेतागीरी करने वाले वकीलों ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी और श्रीराम को काल्पनिक चरित्र तक बताने के लिए हलफनामे भी न्यायालय में दाखिल किये। लेकिन भाजपा प्रारंभ से ही भगवान श्रीराम के मंदिर को लेकर गंभीर थी और अपने घोषणापत्र के मध्यम से देश की जनता के सामने अपनी प्रतिबद्धता बार-बार उजागिर किया है।

 राम मंदिर संघर्ष में दलित समाज के महिला और पुरुषों की बड़ी संख्या में भागीदारी थी। सन् 1992 में जब कार सेवा प्रारंभ हुआ और उस विवादित बाबरी ढांचा को ध्वस्त कर दिया गया। उस समय देखने में यही आया की कार सेवा के लिए 6 दिसंबर 1992 लगभग 10 लाख लोग वहां इकट्ठा हुए थे। जिनमें लगभग 2 लाख महिलाएं भी थी। इन दस लाख लोगों में लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या दलितों की थी। महिलाएं भी अधिकांश दलित समाज की ही थी। सड़कों पर शौचादि स्नान-ध्यान के उपरांत भोजन पकाना और खाना, सामान्य रूप से  समझा जा सकता है कि किसी अभिजात्य वर्ग की महिलाओं द्वारा ऐसा नहीं किया जा सकता था। आज जब राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो गया है तो दलित समाज भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार को कोटि कोटि कोटि धन्यवाद देता है। विवादित ढांचा को अंतिम धक्का दलित समाज ने ही दिया एवं अंत में भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु आदेश पर महामहिम राष्ट्रपति श्रद्धेय श्री रामनाथ कोविंद का हस्ताक्षर भी अंतिम ही रहा।

भाजपा, संघ, विहिप सहित कई अन्य संगठन एवं संस्थाएं दशकों से अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन करने के साथ ही न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे थे। 1992 में बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद यह प्रकरण उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय में गया था, जहां 30 नवम्बर 2010 को मंदिर के पक्ष में निर्णय आया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया था। बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुनकर विवादित जमीन रामलला को सौंप दी। अयोध्या में अब श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है और जब मंदिर का निर्माण पूर्ण हो गया है, यह उपलब्धि भी निसंदेह मोदी सरकार के खाते में ही जुडी है।

दलित शरणार्थीयों हित हेतु नागरिकता संशोधन कानून
 
मोदी सरकार की एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में नागरिकता संशोधन कानून को भी देखा जा सकता है। इस कानून का सर्वाधिक लाभ दलित समाज के उन दुर्भाग्यशाली लोगों को प्राप्त हुआ जो सन 1947 के भारत विभाजन के मध्य तत्कालीन पाकिस्तान और आज के पाकिस्तान एवं  बांग्लादेश में सफाई के काम कराने के लिए बंदूक के बल पर बलपूर्वक रोक लिया गया। दलित समाज की एक विशाल जनसंख्या तत्कालीन पाकिस्तान वाले भाग में थी,  उनमें अधिकतर लोग आर्थिक रूप से अशक्त होने के कारण भारत नहीं आ सके किंतु आज भी वे पाकिस्तान या बांग्लादेश में नरक सा जीवन जी रहे हैं। 

नागरिकता संशोधन कानून के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों के ऐसे धार्मिक रूप से मुसलमानों द्वारा प्रताड़ित अल्पसंख्यक किसी प्रकार शरणार्थी के रूप में भारत आ जाते हैं। ऐसे में उन अभागे शरणार्थीयों को चाहे वे हिंदू, बौद्ध, ईसाई, जैन, सिख धर्म के लोग हो, उन्हें इस नागरिकता संशोधन कानून के आधार पर भारत सरकार द्वारा भारत की नागरिकता दी. जाएगी। 

इस निर्णय का भारत में व्यापक स्वागत हुआ। किंतु कुछ भारत विरोधी, टुकड़े-टुकड़े, अवार्ड वापसी गैंग इत्यादि द्वारा शाहीन बाग जैसे मॉडल तैयार किए गए। ऐसे प्रयोगों को देश ने नकार दिया और उनकी व्यापक निंदा भी हुआ। नागरिकता संशोधन कानून का संपूर्ण दलित समाज ने अपने बिछड़े हुए शरणार्थी दलित भाई-बहनों को नागरिकता का अधिकार दिये जाने का खुलकर के स्वागत किया।

भव्य समारोह नहीं किन्तु डिजिटली जुड़ेंगें सत्तर करोड़ लोग

फिलहाल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धियों को सामान्यलोगों तक पहुंचाने के लिए अपनी तैयारी कर रही हैI कोरोना संकट को देखते हुए यह कार्य उस डिजिटल प्लेटफार्म के मध्यम से किया जायेगा, जिस प्लेटफॉर्म को मोदी सरकार ने पूर्ण रूप से उन्नत बनाने का काम किया है। कोरोना संकट में यह डिजिटल प्लेटफॉर्म और डिजिटल प्रगति ने देशवासियों को कई मुसीबत से मुक्ति दिलाई है। यही डिजिटल प्लेटफॉर्म अब जनता को मोदी सरकार के कार्यों से अवगत कराने में अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा। 

डिजिटल प्लेटफॉर्म से वर्चुअल कॉन्फ्रेंस, वर्चुअल रैली का आयोजन किया जायेगाI फेसबुक लाइव, वर्चुअल रैली, वर्चुअल प्रेसवार्ता इत्यादि के मध्यम से देश के लगभग पचास करोड़ लोगों तक मोदी सरकार की उपलब्धियों, जनउपयोगी कार्यों एवं राष्ट्रीय प्रगति के सम्बन्ध में वह सभी जानकारियां तो पहुंचायी ही जाएगी, साथ ही सरकार की आगामी योजनाओं के सम्बन्ध में भी जनता को अवगत कराया जायेगा। विश्व नेताओं की रेटिंग में प्रधानमंत्री मोदी प्रथम दस बड़े नेताओं की सूची में अपना स्थान बना चुके हैं। उन्हें यह स्थान उनकी कार्य क्षमता, दूरदर्शिता, प्रशासनिक क्षमता और कोरोना से निपटने वाले सबसे अच्छा योद्धा के रूप में कार्य करने के लिए प्राप्त हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी का बढ़ता कद और दुनिया में भारत की निरंतर बदलती छवि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।